सांस्कृतिक एवं धरोहर संरक्षण

वर्ष 2019–2021 के दौरान संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में कार्य करते हुए श्री प्रह्लाद सिंह पटेल जी ने भारतीय संस्कृति, परंपराओं और अमूल्य धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए अनेक ऐतिहासिक पहलें कीं। उनका प्रयास रहा कि भारत की प्राचीन सभ्यता, लोक परंपराएँ, भाषाएँ, त्योहार, कला और ऐतिहासिक धरोहरें संरक्षित रहें, और आधुनिक तकनीक और जनसहभागिता के माध्यम से नई ऊर्जा के साथ पुनर्जीवित हों और वैश्विक स्तर पर पहचान प्राप्त करें । श्री पटेल जी के नेतृत्व में कई महत्त्वपूर्ण योजनाएँ और कार्यक्रम प्रारंभ हुए जैसे :-

  • वर्ष 2019 में इंडियन कल्चर पोर्टल का शुभारंभ हुआ।पोर्टल के माध्यम से भारत की विविध सांस्कृतिक धरोहर, संग्रहालयों, पुस्तकालयों, पुरातात्विक स्थलों, लोक कलाओं, त्योहारों और भाषाई परंपराओं की समृद्ध जानकारी डिजिटल मंच पर हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध हुई ।
  • ⁠वर्ष 2020 में असंभव सांस्कृतिक धरोहर की राष्ट्रीय सूची (National List of Intangible Cultural Heritage) की स्थापना कर देशभर की पारंपरिक कलाओं, लोक उत्सवों, नृत्य-गीतों, बोलियों और हस्तशिल्पों को आधिकारिक मान्यता प्रदान की गई, जिससे उनकी सुरक्षा एवं पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरण की राह सुदृढ़ हुई।
  • ⁠‘हेरिटेज इन डिजिटल स्पेस’ पहल – हम्पी जैसे ऐतिहासिक स्थलों के डिजिटल पुनर्निर्माण हेतु 3-डी स्कैनिंग, वर्चुअल रियलिटी और होलोग्राफी जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग कर धरोहर संरक्षण को आधुनिक आयाम दिया गया।
  • ⁠‘देखो अपना देश’ अभियान – घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने, देशवासियों में सांस्कृतिक विविधताओं के प्रति गर्व की भावना जगाने तथा स्थानीय परंपराओं, खान-पान, वेशभूषा और बोलियों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने हेतु यह अभियान प्रारंभ किया गया।
  • ⁠ऑनलाइन प्रदर्शनी और लोककला संवर्धन – रामायण की पहली ऑनलाइन प्रदर्शनी, हिमाचल की लोककलाओं पर केंद्रित प्रदर्शनी तथा राष्ट्रीय संग्रहालय में पुरातात्विक धरोहरों का आमजन के लिए प्रस्तुतीकरण एक महत्त्वपूर्ण योगदान है।
  • ⁠पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक स्थलों की देखभाल – ‘संकल्प पर्व’ के अंतर्गत वृक्षारोपण एवं पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण-सौंदर्यीकरण के अनेक कार्य किए गए, जिससे सांस्कृतिक धरोहरों और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित हो सके।

श्री पटेल जी का स्पष्ट मत है कि संस्कृति केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की पहचान भी है। उनके नेतृत्व में उठाए गए कदम न केवल परंपराओं के संरक्षण का प्रतीक हैं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना को नयी ऊँचाइयों तक पहुँचाने का संकल्प भी हैं।