गौ सेवा

प्रहलाद सिंह पटेल जी का गौ सेवा के प्रति समर्पण मात्र एक धार्मिक भावना नहीं, बल्कि संस्कृति, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण का एक समग्र दृष्टिकोण है। उनके कार्य न केवल समाज को प्रेरित करते हैं, बल्कि युवाओं को भी गौ आधारित नवाचार और सेवा के मार्ग पर चलने का संदेश देते हैं। गौ सेवा के प्रति उनका समर्पण, नीतिगत कार्यों से लेकर जमीनी स्तर पर सेवा कार्यों तक स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।

प्रहलाद सिंह पटेल जी ने दिनांक 26.07.2002 को संसद में निजी संकल्प के रूप में चर्चा के लिए अपने आराध्य परमपूज्य ""श्री श्रीबाबाश्री जी"" की वाणी ""जीव-जीव आहार नहीं, जीव-जीव आधार"" का उद्धरण देते हुए 'गौवंश की हत्या पर रोक"" विषय पर महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा तथा अंत में ""श्री श्रीबाबाश्री जी"" की वाणी ""संकल्प में विकल्प नहीं"" के साथ अपनी बात समाप्त की, जिसे बहस के लिए स्वीकार किया गया। परिणाम स्वरूप स्वतंत्र भारत की संसद में पहली बार दिनांक 26 जुलाई, 2003 को में गौ-रक्षा का संकल्प पारित हुआ।

प्रमुख कार्य और पहलें:

गौशालाओं की स्थापना और सशक्तिकरण:

दमोह, नरसिंहपुर और अन्य क्षेत्रों में अनेक गौशालाओं की स्थापना में सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कर, गौशालाओं को आत्मनिर्भर एवं सुव्यवस्थित बनाने हेतु निजी सहयोग, जनभागीदारी, तथा सरकारी योजनाओं के समन्वय का मार्ग प्रशस्त किया।

बीमार और बेसहारा गौवंश की सेवा:

सड़कों पर घूमने वाले असहाय, घायल या बीमार गौवंश के संरक्षण हेतु विशेष अभियान चलवाए। गौवंश के उपचार हेतु चलित पशु एम्बुलेंस की शुरुआत की।उनके प्रयासों से पशु चिकित्सालय में आधुनिक उपकरण और विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध हुए, जिससे उपचार की गुणवत्ता में सुधार हुआ।

गौवंश संरक्षण हेतु जनजागरण:

गौसंवर्धन, गौपालन और गौ-आधारित कृषि के लाभों को लेकर ग्राम सभाओं, कार्यशालाओं और धार्मिक आयोजनों में जागरूकता अभियान चलाया। युवाओं को गौ आधारित स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया।

नीतिगत सहयोग:

संसद और मंत्रिमंडल में रहते हुए उन्होंने गौ संरक्षण से जुड़ी योजनाओं और प्रस्तावों का समर्थन किया। मध्य प्रदेश सरकार की गौ अभ्यारण्य योजना और अन्य योजनाओं में उन्होंने मार्गदर्शक भूमिका निभाई।

धार्मिक और सांस्कृतिक पहल:

धार्मिक आयोजनों जैसे गौ कथा, गौ पूजा, और गौ अष्टमी पर वे नियमित रूप से भाग लेते रहे हैं, जिससे समाज में गौ माता के प्रति श्रद्धा और संवेदना जागृत हो।

प्रह्लाद सिंह पटेल द्वारा स्थापित नर्मदा सेवा खंड संस्थान द्वारा वर्ष 2016 में संस्थापित ‘जरारूधाम गौ अभयारण्य’, रामनगर, बटियागढ़ (जिला दमोह) एक प्रेरणादायी पहल है, जो गौसेवा की भारतीय परंपरा को जीवंत बनाए हुए है।इस पुनीत कार्य का संचालन नर्मदा सेवा खंड संस्थान के माध्यम से किया जा रहा है, जो सामाजिक, धार्मिक और पारिस्थितिक संतुलन के क्षेत्र में सक्रिय है। संस्थान द्वारा अभयारण्य को जैविक खेती, प्राकृतिक चिकित्सा और ग्रामीण सहभागिता से जोड़कर इसे आत्मनिर्भरता और सेवा का आदर्श केंद्र बनाया गया है।अभयारण्य में बेसहारा, असहाय और घायल गौवंश को सुरक्षित आश्रय, उपचार और संरक्षण प्रदान किया जाता है। उन्होंने इसे केवल गौशाला नहीं, बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और जैविक कृषि के संगम स्थल के रूप में विकसित किया है। यहां प्राकृतिक चिकित्सा, जैविक खाद और ग्रामीण सहभागिता को बढ़ावा देकर स्थानीय लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य भी किया जा रहा है। जरारूधाम आज केवल गौसंरक्षण का स्थल नहीं, बल्कि करुणा, संस्कृति और सेवा का जीवंत प्रतीक बन चुका है।


पर्यावरण संरक्षण संकल्प

प्रहलाद सिंह पटेल जी, न केवल राजनीति में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनके समर्पण के लिए भी प्रसिद्ध हैं। उनका मानना है कि पर्यावरण और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी केवल शब्दों तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि इसके लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। ""वृक्ष से जल, जल से जीवन"" यह उनका प्रेरणादायक ध्येय वाक्य है, जो उनके पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों का मार्गदर्शन करता है।

नर्मदा सफाई अभियान: प्रह्लाद सिंह पटेल जी का पर्यावरण संरक्षण हेतु समर्पित प्रयास

प्रह्लाद सिंह पटेल जी द्वारा संचालित नर्मदा सफाई अभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक पहल रही है। नर्मदा नदी, जिसे ""जीवित देवी"" के रूप में पूजा जाता है, भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन की आधारशिला है। प्रहलाद ने नर्मदा के संरक्षण को केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि एक सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के रूप में देखा।

इस अभियान के अंतर्गत उन्होंने नर्मदा के किनारे बसे गांवों, कस्बों और नगरों में जनजागरण की श्रृंखला चलाई, जिसमें नागरिकों को न केवल नदी की सफाई के लिए प्रेरित किया गया, बल्कि उन्हें इसके महत्व से भी अवगत कराया गया।वर्षा जल संचयन, घाटों की सफाई, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, और जैविक कचरे को नदी में जाने से रोकने हेतु प्रभावी कदम उठाए गए। अभियान में आम जनता, स्वयंसेवी संस्थाएं, छात्रों और स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई।

उनका यह मानना है कि ""नदियाँ हमारी सभ्यता की धरोहर हैं। यदि इन्हें स्वच्छ और संरक्षित नहीं रखा गया, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें क्षमा नहीं करेंगी। नर्मदा सफाई अभियान न केवल एक नदी की स्वच्छता की पहल थी, बल्कि यह जल संरक्षण, जनजागृति और पर्यावरणीय चेतना का एक संगठित आंदोलन बन गया है, जिसका नेतृत्व प्रह्लाद सिंह पटेल जी ने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ किया।

उद्गम मानस यात्रा: प्रकृति के प्रति सम्मान और जागरूकता

उद्गम मानस यात्रा भी प्रह्लाद सिंह पटेल जी का एक महत्वपूर्ण पर्यावरण संरक्षण अभियान है। यह यात्रा मध्यप्रदेश के उन दुर्गम इलाकों में आयोजित की गई, जहां जल स्रोतों और नदियों का उद्गम होता है। उनका मानना है कि अगर हम जल स्रोतों की सुरक्षा और संवर्धन करेंगे, तो न केवल पानी की आपूर्ति बनी रहेगी, बल्कि आसपास के क्षेत्र भी हरे-भरे रहेंगे। इस यात्रा के दौरान पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर जनता के बीच जागरूकता फैलाने के लिए सेमिनार और कार्यशालाएं आयोजित की गईं, जिसमें वन्यजीव संरक्षण, जल संरक्षण, वृक्षारोपण, और जलवायु परिवर्तन पर चर्चा की गई।साथ ही उद्गम स्थलों पर सघन्य वृक्षारोपण एवं संरक्षण हेतु अन्य आधारभूत संरचनाएँ जनसहयोग के द्वारा बनाई जाकर संपूर्ण अभियान को नयी दिशा दी है।

वृक्षारोपण और जल संरक्षण अभियानों की सफलता

प्रह्लाद सिंह पटेल जी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों में कई वृक्षारोपण अभियानों की शुरुआत की गई।वृक्षारोपण की दर में वृद्धि करने के लिए उन्होंने स्थानीय किसानों और ग्रामीणों को प्रोत्साहित किया। उनका मानना है कि पेड़-पौधे न केवल पर्यावरण को शुद्ध रखते हैं, बल्कि जलवायु परिवर्तन को भी नियंत्रित करते हैं। ""जल ही जीवन है"" इस सिद्धांत को उन्होंने अपने जीवन का हिस्सा बना लिया, और जल संरक्षण के लिए विभिन्न योजनाओं को लागू किया। उनके नेतृत्व में जलस्रोतों के पुनर्जीवन, तालाबों और कुओं की सफाई, तथा वर्षा जल संचयन पर विशेष कार्य किया जा रहा है।

प्लास्टिक मुक्त भारत: एक स्वस्थ पर्यावरण की दिशा में कदम

प्रह्लाद सिंह पटेल जी ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया, जो था प्लास्टिक मुक्त भारत अभियान। उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर प्लास्टिक के उपयोग को रोकने के लिए कई बार पहल की। विशेष रूप से पर्यटन स्थलों और धार्मिक स्थानों पर उन्होंने प्लास्टिक के उपयोग को प्रतिबंधित करने के लिए सख्त नियम लागू किए। इसके साथ ही, उन्होंने लोगों को कागज, कपड़ा और अन्य पर्यावरण अनुकूल विकल्पों के उपयोग के लिए प्रेरित किया।

सरकार के प्रयासों में योगदान

केंद्रीय मंत्री के रूप में प्रह्लाद सिंह पटेल जी ने पर्यावरण संरक्षण को सरकार की नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। उन्होंने बड़ी ही कार्यकुशलता से कई योजनाओं का कार्यान्वयन किया , जैसे कि 'स्वच्छ भारत मिशन' और 'जल जीवन मिशन', जिसके तहत जल संरक्षण और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके अलावा, उन्होंने पर्यटन स्थलों पर सस्टेनेबल टूरिज़्म को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं बनाई, ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे और साथ ही पर्यटन उद्योग भी विकसित हो सके।

प्रह्लाद सिंह पटेल जी का पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण उनकी नीतियों और कार्यों के माध्यम से स्पष्ट होता है। उनके द्वारा चलाए गए अभियानों ने न केवल पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाई, बल्कि समाज को भी प्रकृति से जुड़ने का एक नया दृष्टिकोण दिया है। उनकी अगुवाई में चलाए गए इन अभियानों से यह सिद्ध होता है कि जब नेतृत्व और जनता दोनों मिलकर काम करते हैं, तो हम पर्यावरण संरक्षण में बड़े बदलाव ला सकते हैं।


नशा मुक्ति

छात्र राजनीति के दौर से ही श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने समाज को नशे की जकड़न से मुक्त कराने का बीड़ा उठाया। उसी समय से उन्होंने नशा मुक्ति की यात्रा प्रारंभ की और नरसिंहपुर जिले में जनजागरण के लिए अनेक पदयात्राएँ आयोजित कीं प.पू. श्रीश्री बाबाश्री जी की प्रेरणा से श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने समाज को नशे के दुष्प्रभावों से मुक्त कराने का संकल्प लिया। इसी कड़ी में नवम्बर 1987 में उन्होंने नरसिंहपुर जिले के गोटेगाँव में शराब की दुकानों को शहर से बाहर करने की माँग को लेकर इतनी कम उमर में 11 दिन तक लगातार अनशन किया।

सन् 1989 में जब वे पहली बार सिवनी से सांसद निर्वाचित हुए, तब सिवनी व बालाघाट के बीच बरघाट के पास उत्तर प्रदेश में श्री पटेल ने उसी समय नशा विरोधी अभियान की शुरुआत की और शराब की फैक्ट्री (डिस्टलरी) को वहाँ से हटवाने में सफलता पाई। उनके इस अभियान से लोग जुड़ते चले गए और विभिन्न स्थानों पर शिविर आयोजित कर लोगों को नशा मुक्ति के लिए प्रेरित किया जाने लगा।

सन् 2009 में उन्होंने कटनी जिले के बहोरीबंद विकासखंड के ग्राम मसंदा को पूर्णतः नशा मुक्त बनाने का संकल्प पूर्ण किया

उनके अथक प्रयासों से प्रभावित होकर कोल समाज ने यह प्रतिज्ञा ली कि वे न शराब बनाएंगे, न बेचेंगे और न ही उसका सेवन करेंगे।

नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा विकासखंड के ग्राम सोकलपुर में उनके नेतृत्व में चलाए गए नशा मुक्ति अभियान को संपूर्ण महाकौशल क्षेत्र में एक महायज्ञ के रूप में देखा गया। श्री पटेल और उनकी टीम ने आस-पास के क्षेत्रों में भी नशा मुक्ति का संदेश पहुँचाया और समाज को एक नई दिशा दी।