प्रारंभिक जीवन

प्रहलाद सिंह पटेल का जन्म 28 जून, 1960 को मध्यप्रदेश के महाकौशल क्षेत्र नरसिंहपुर जिले के तहसील गोटेगांव में पिता श्री मुलाम सिंह पटेल व माता श्रीमती यशोदा बाई, कृषक परिवार में हुआ। उन्होंने आदर्श विज्ञान महाविद्याय, जबलपुर से बीएससी (course), व रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर से एल.एल.बी. व एम.ए. (दर्शन) की शिक्षा पूर्ण कीI श्री पटेल छात्र राजनीति में एक प्रखर और प्रभावशाली व्यक्तित्व रहे हैं।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता के रूप में कार्य करते हुए व जवाबदारी का निर्वाह/निर्वहन करते हुए राबर्टसन (साइंस) कॉलेज के छात्र संघ अध्यक्ष के रूप में मात्र 20 वर्ष की आयु में 1981 में विजयी हुए।सेवा, समर्पण व सामुदायिक सहभागिता के क्षेत्र में अपने कार्यों की वजह से एक बिल्कुल ही अलग तरह की पहचान बनाई है।

प्रारंभिक जीवन

  • जन्म : 28 जून 1960, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश। उन्होंने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर से स्नातक और एलएलबी की डिग्री प्राप्त की।
  • 1970–1980 के दशक : एबीवीपी में छात्र नेता के रूप में शुरुआत; 1982 में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिला अध्यक्ष बने। 1986–1990 तक उन्होंने मध्य प्रदेश भाजयुमो के सचिव के रूप में भी कार्य किया।
  • 1980–81 : जबलपुर के गवर्नमेंट साइंस कॉलेज में छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

सांसद – लोकसभा कार्यकाल

  • 1989 (9वीं लोकसभा): सिवनी निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए।
  • 1996 (11वीं लोकसभा): सिवनी से पुनः चुने गए।
  • 1999 (13वीं लोकसभा): बालाघाट से चुने गए।
  • 2014 (16वीं लोकसभा): दमोह से चुने गए।
  • 2019 (17वीं लोकसभा): दमोह से पुनः चुने गए।

केंद्र सरकार में मंत्री

  • 2003–2004: अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में कोयला राज्य मंत्री।
  • 2019 – 2021 : नरेन्द्र मोदी सरकार में पर्यटन और संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)।
  • 2021 – 2023 : खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और जल शक्ति के राज्य मंत्री।

राज्य सरकार में मंत्री

  • 2023: मध्य प्रदेश विधान सभा में नरसिंहपुर से विधायक चुने गए।
  • 25 दिसंबर 2023: मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम विभाग के कैबिनेट मंत्री के रूप में नियुक्त किए गए।

दृष्टिकोण एवं योगदान

श्री पटेल ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन, सांस्कृतिक धरोहर और पर्यावरणीय स्थिरता के प्रबल समर्थक रहे हैं। उन्होंने गांवों के लिए कई कल्याणकारी कार्यक्रम शुरू किए, कौशल विकास को बढ़ावा दिया और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर अवसंरचना तथा रोजगार के अवसरों के लिए कार्य किया है।

वे भारतीय संस्कृति, शाकाहार और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों के लिए भी जाने जाते हैं। उनकी आध्यात्मिक यात्रा दो नर्मदा परिक्रमाओं में झलकती है, जिसमें उन्होंने नदियों के उद्गमों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरुकता लाने के लिए कई लम्बी पैदल यात्राएं कीं।

व्यक्तिगत मूल्य

श्री प्रहलाद सिंह पटेल अपनी सादगी, जनकल्याण के प्रति दृढ़संकल्पित और समावेशी विकास में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित हैं। उनका जीवन और कार्य युवा नेताओं और नागरिकों को प्रेरित करता है, जो राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहते हैं।

आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक जीवन

  • प्रहलाद सिंह शाकाहारी जीवनशैली को अपनाते हैं और भारतीय संस्कृति व परंपराओं केप्रति गहरी आस्था रखते हैं।
  • श्री निर्विकार पथ के प्रणेता श्री श्री बाबाश्री जी की प्रेरणा और मार्गदर्शन से लोगों के निर्देशन में लोगों के जीवन को विकार मुक्त करके विकसित करना।
  • पवित्र नदी नर्मदा की परिक्रमा दो बार पूरी की (1994-96 और 2005), जो लगभग 3300 किमी की पैदल यात्रा है। परिक्रमा के माध्यम से उन्होंने नर्मदा नदी के पर्यावरण संरक्षण और इसके सांस्कृतिक महत्व को बढ़ावा देने का कार्य किया।
  • मध्यप्रदेश सरकार के प्रकल्प, जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत विगत एक वर्ष में 100 से ज्यादा नदियों के उद्गम स्थलों पर पहुँच कर उनका संरक्षण एवं संवर्धन व क्षेत्रवासियों से संवाद कर जन-जागरण । आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व के अलावा पर्यावरण संरक्षण का सकारात्मक प्रयास।

उनका राजनितिक एवं सामाजिक जीवन शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता एवं सांस्कृतिक विषयों पर कार्यों की व्यापक श्रृंखला है, जो अनवरत जारी है।