परिक्रमा क्या देगी ? पूर्णता, परिपूर्णता और संपूर्णता यही परिक्रमा का अर्थ और यही सामर्थ्य है पैदल यात्राओं का। परिक्रमाओं ने मुझे शिक्षा दी, संस्कार दिए, साथी दिए, साथियों को विश्वास में बाँधने के अवसर दिए। उसके लिए भविष्य में मुझे पुस्तक लिखनी पड़ेगी, तब यह विचार नहीं था। यह माँ नर्मदा की परिक्रमा का सार' है। यह बुद्धि-कौशल के प्रभाव से प्राप्य नहीं है। यह तो ज्ञान के सत्यांश से प्राप्त अनुभूति का ऐसा दिव्य प्रकाश है, जिससे अंतरात्मा जाग्रत् हो उठी है। जीवन को सही मार्गदर्शन मिला है। यह मेरे आराध्य श्रीश्री बाबाश्री के ज्योति पुंज की अनुकंपा- कृपा और उनके द्वारा की गई रक्षापूर्ण दया और सान्निध्य की स्मृतियाँ हैं। इन्हें मैंने अपने सहपरिक्रमावासियों के साथ-साथ श्रवणेद्रियों से ग्रहण करके इन पृष्ठों में अंकित भर करने का प्रयत्न किया है। उन्हीं श्रीचरणों की असीम अनुकंपा से और आज्ञा मिलने पर इसे मुद्रित कराकर आप तक पहुँचाने की छोटी सी चेष्टा है। परमपूज्य श्रीश्री बाबाश्री जी की वाणी है- 'बुद्धि भ्रमित करती है, लेकिन ज्ञान तटस्थ करता है।' यह तटस्थ भाव पैदल यात्राएँ ही पैदा करती हैं- यह मेरा अटल विश्वास है।
नर्मदे हर ! ॐ श्रीमाँ !!