"उद्धरण"

जैसे नदियाँ पर्वतों से निकलती हैं,
विघ्नों को चीरती, राह बनाती हैं –
वैसे ही आपका जीवन,
संघर्षों को साध कर समाज का पथप्रदर्शन करता है।

- श्री प्रहलाद सिंह पटेल

विघ्नों से न डरे, थकान से न झुके –
नदी की तरह अनवरत बहता आपका पुरुषार्थ।
हर मोड़ पर नई प्रेरणा,
हर धार में जनसेवा का समर्पण।

- श्री प्रहलाद सिंह पटेल

नदी की तरह बहता जीवन – न रुकता, न थमता,
हर पत्थर से टकराकर भी दिशा खोजता।
संघर्षों की धार में तपकर,
आपका जीवन बना लोककल्याण की गाथा।

- श्री प्रहलाद सिंह पटेल

नर्मदा सी शीतलता, पर भीतर लहराता अदम्य साहस।
नदी की तरह जमीनी, जीवन की तरह गहराई लिए –
आपका प्रत्येक कदम जनसेवा की ओर प्रवाहित।

- श्री प्रहलाद सिंह पटेल

आपका जीवन नर्मदा की धारा जैसा –
मौन, पर अनवरत; सरल, पर सबल।
जिसने खुद को नहीं रोका,
वही औरों की प्यास बुझा पाया।

- श्री प्रहलाद सिंह पटेल

नदियाँ चलती हैं राह बनाते हुए,
ठहरती नहीं, बहती हैं संकल्प लेकर।
आपका जीवन भी उसी धारा का नाम है,
जो जनमानस को सींचता है चुपचाप।

- श्री प्रहलाद सिंह पटेल

सादगी में शक्ति, कर्म में समर्पण,
आपका जीवन एक आदर्श पथ है।
जनसेवा की गाथा, संस्कृति का स्पंदन –
आपमें दिखती है भारत की आत्मा।

- श्री प्रहलाद सिंह पटेल